Mahavir Jayanti 2026 Date : कब है महावीर जयंती? जानें महावीर स्वामी के 5 सिद्धांत एवं उनके विचार
महावीर जयंती को भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में भगवान महावीर 31 मार्च को मनाई जाएगी।
Mahavir Jayanti 2026 Date: जैन धर्म के लोगों के लिए महावीर जयंती एक महत्वपूर्ण पर्व है। इसे लोग बड़े हर्षोल्लास के साथ मानते है इस दिन को भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में भगवान महावीर 31 मार्च को मनाई जाएगी।
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भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे उन्होंने लोगों को हमेशा सत्य, अहिंसा और धर्म के मार्ग में चलने का संदेश दिया है। उनके उपदेशों से लोगों को सच्चाई, त्याग, प्रेम और सदाचार के साथ जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। जो आज के आधुनिक जीवन में भी बहुत बड़ी सीख है। आज भी उनके सिद्धांत जीवन को सही दिशा देने का काम करते हैं। आइए जानते हैं भगवान महावीर के विचार और उनके पाँच प्रमुख सिद्धांत।
भगवान महावीर के विचार
- अहिंसा परमो धर्म – उन्होंने अपने विचार में अहिंसा परमो धर्म पर जोर दिया है जिसका मतलब है- अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट नहीं देना चाहिए।
- सत्य ही धर्म है – उन्होंने हमेशा लोगों को सत्य बोलने को कह है- उनका "सत्य ही धर्म है" का विचार आत्मा की शुद्धि का मार्ग में जाने ओ प्रेरित करता है।
- क्रोध को प्रेम से जीतो – हमेशा क्रोध को प्रेम से ही जीता जा सकता है उनका "क्रोध को प्रेम से जीतो " का विचार आज भी जीवन का सबसे बड़ा सबक है क्योंकि क्रोध से क्रोध से कभी खत्म नहीं किया जा सकता है क्रोध को प्रेम से ही समाप्त किया जा सकता है
- लालच सबसे बड़ा शत्रु – उन्होंने लालच को इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है, क्योंकि लालच में पड़ा व्यक्ति कभी खुश नहीं रह सकता।
- अपने आप को जीतना सबसे बड़ी जीत– उन्होंने अपने आप पर जीत को की सबसे बड़ी जीत बताया है उन्होंने अपने विचार में कहा है कि "हजारों दुश्मनों को जीतने से बड़ी जीत स्वयं पर विजय" पाना है
- जीओ और जीने दो – उन्होंने हमेशा लोगों को "जीओ और जीने दो" के विचार की ओर प्रेरित किया है उनका कहना है कि सभी का जीने का बराबर अधिकार है इसलिए किसी जीव को नुकसान न पहुचाए ।
- शांति बाहर नहीं, खुद के भीतर – उन्होंने खुद को शांत रखना है सबसे बड़ी शांति की अवधारणा दिया है क्योंकि उनका विचार है की "शांति बाहर नहीं, खुद के भीतर" होती है।
- बुराई से नहीं, बुराई करने वाले से प्रेम करो – उन्होंने हमेशा प्रेम की विचार दिया है उनका विचार है कि- "बुराई से नहीं, बुराई करने वाले से प्रेम करो" – व्यक्ति को नहीं, उसकी बुराई को खत्म करो।
भगवान महावीर के 5 प्रमुख सिद्धांत | Mahavir Swami ke 5 siddhant kya hain
- अहिंसा : मन, वचन और कर्म से चोट नहीं पहुँचाना ही अहिंसा है।
- सत्य : हमेशा सत्य बोलना चाहिए। झूठ बोलना पाप है और सत्य बोलना धर्म है।
- अचौर्य : चोरी नहीं करनी चाहिए और बिना अनुमति किसी की वस्तु नहीं लेनी चाहिए।
- ब्रह्मचर्य : इंद्रियों पर नियंत्रण रखना, गलत विचारों और गलत कामों से दूर रहना ही ब्रह्मचर्य है।
- अपरिग्रह : ज्यादा धन, वस्तुएं और लालच नहीं करना चाहिए। जरूरत जितनी हो उतना ही रखना चाहिए।.
(Disclaimer- प्यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। SAMAY SATTA NEWS लेख की पुष्टि नहीं करता है)
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यह लेख एडमिन द्वारा पोस्ट किया गया है, इस ब्लॉग में सामग्री पूरी तरह से विश्वसनीय है। प्रोफ़ाइल